162-डिग्री या संस्कार

पढ़िए

एक पूर्व आई.पी.एस. अधिकारी का अनुभव क्या कहता हैं:-✍️

“2009 में जब शशि थरूर राजनीति में आए तो, मैं बहुत उत्साहित था। मुझे अब भी अपने कई एनआरआई दोस्तों से बात करना याद है कि कैसे भारत की राजनीति बेहतर तरीके से बदलेगी और उनके जैसे बुद्धिमान लोग राजनीति में शामिल होंगे।”

“फिर 2013 तक, मेरा कांग्रेस से मोहभंग हो गया और मुझे लगा कि अन्ना हजारे, आईआईटीयन केजरीवाल, आईपीएस किरण बेदी, अभिनेता आमिर खान द्वारा समर्थित भारत में एक नए बदलाव की शुरुआत होगी। मैंने भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत को कुछ दान भी दिया, रामलीला मैदान में जाकर नारे भी लगाये।”

“अब अगर मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मैं केवल खुद पर हंसता हूं। लेकिन मुझे खुशी है कि मेरी अपनी सोच में जो खामी थी मुझे उसका एहसास, तो हो गया ।

हमारे द्वारा शशि थरूर या केजरीवाल जैसे लोगों का समर्थन करने का कारण यह है कि वे उचित संस्थानों से शिक्षित हैं।

बचपन से ही हमारा ब्रेनवॉश किया जाता है कि व्यक्ति में अच्छी शिक्षा से ही अच्छाई आती है.”.

मग़र नहीं ऐसा विल्कुल नहीं है।

चिदंबरम हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए हैं और हम सब जानते हैं कि उन्होंने क्या किया..?

कैम्ब्रिज से हैं मणिशंकर अय्यर हम सभी जानते हैं कि वह किस तरह की बकवास करते हैं।

कपिल सिब्बल हार्वर्ड लॉ ग्रेजुएट हैं और वे केवल आतंकवादियों के लिए दया याचिका लिखते हैं और गोमांस बेचते हैं।

ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के पास पार्टी में उच्च शिक्षित लोग नहीं थे। कई एक थे। लेकिन वे सभी दिमांगी तौर पर बदमाश ही थे। और

कई तरह से स्पष्ट हो चुका है..कि, एक सामान्य स्तर पर शिक्षा प्राप्त व्यक्ति से एक ‘उच्च शिक्षित-बदमाश’ समाज के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित होता है।

क्योंकि वह आपको और भी नए-नए तरीकों से ठगता है।

इस्लामी आक्रमणकारियों से लेकर अंग्रेजों तक सभी को उच्च शिक्षित और बुद्धिमान भारतीयों का समर्थन प्राप्त था।

हाँ, आपको देश पर प्रभुता करने के लिए उनकी आवश्यकता है? इसलिए भारत के शासकों ने बदमाशों का एक समूह बनाकर देश में बदमाशों की एक फसल जैसी वो डाली। जो आम जनता पर शासन करने और हमें सदैव गरीब रखने में अच्छी तरह से पारंगत थे।

अब नेहरू चाचा और उनके परिवार ने भी इसी प्रवृत्ति को बल दिया और ऐसे तत्वों के लिए समर्थन जारी रखा। और भारत पर शासन करने के लिए उच्च शिक्षित बदमाशों का एक समूह तैयार करते चले गए।

आज इस समूह को ‘पॉलिटिकल-लैंगुएज’ में लुटियन कहा जाता हैं। क्योंकि वे दिल्ली में लुटियंस नामक क्षेत्र में रहते हैं और वे हमेशा आप जनता को लूटने की ही योजनाएं बनाते रहे हैं। मांफी चाहूँगा देश के नेताओं की वास्तविक तश्वीर आपके समक्ष प्रस्तुत करने का कोई प्रयास नहीं है.. ये तो मेरा एक ‘तुलनात्मक-अध्ययन’ है। इसलिए मेरे कुछ राजनैतिक साथी इसे अन्यथा न लें।

भाजपा के सत्ता में वापस आने और मोदी को पी.एम.प्रोजेक्ट करने से देश की राजनीति में क्या-क्या अहम बदलाव आये.. ?

इसने मेरे जैसे कम अक्ल लोगों को यह एहसास अवश्य कराया है। कि “आई वी लीग-डिग्री” आपको देशभक्त नहीं बनाती है,

इससे आप में ईमानदारी नहीं आती है या कोई भी अच्छाई नहीं सिखाती है। दूसरे,

“जो लोग भारत की संस्कृति और सभ्यता के लोकाचार के आधार पर.. अपने चरित्र, एवं व्यक्तित्व का विकास करते हैं उनमें देशभक्ति और अच्छाई कूट-कूट कर भरी होती है।”

विश्वास न हो तो एक प्रयोग करें:

आप देश के किसी भी हिस्से में और वर्ष के किसी भी समय किसी भी .. यादृच्छिक आर.एस.एस. शाखाओं में जाएं..

और देखें कि वे देश के युवकों को क्या सिखाते हैं –

देशभक्ति, सच्ची-सेवा, अच्छाई, ईमानदारी और सादगी प्रतिदिन सिखाते हैं जो देश के नागरिकों के लिए नितान्त आवश्यक है।

वहाँ यह हर दिन और पूरे वर्ष भर निरन्तर सिखाया जाता है।

अब आप ही बताईये..

आइ.वी.लीग. यूनिवर्सिटी, आई.आई.टी, आई.आई.एम, सेंट स्टीफेंस, दून-स्कूल या कोई भी स्कूल जहां आप फीस के रूप में लाखों रुपये भरते हैं..?

क्या ये संस्थान देश के लिए युवकों में “चरित्र-निर्माण” करते हैं..? हमारे आई.पी.एस. महोदय बताते हैं..कि,

“मैं दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों में गया हूं, मेरे पास छह डिग्री है लेकिन मेरी शिक्षा ने मुझे देशभक्ति या अच्छाई कतई नहीं सिखाई..”

इस विश्लेषण के आधार पर मैं ये कहने को मजबूर हूँ..कि देश में प्रचिलित ये अन्य शिक्षण संस्थाएं हमें मानवीय-संवेदनाओं से परे केवल एक पूर्ण भौतिकवादी नोट छापने की मशीन ही बनाती हैं।और कुछ नहीं।

मेरे माता-पिता ने मुझे पढ़ाया और मैंने स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखी गई पुस्तकें पढ़ीं..

वह व्यक्ति जिसे मैं शहीद भगत सिंह की मूर्ति मानता हूं जिन्होंने देश के लिए वो किया जो डिग्री धारक कभी नहीं कर सकते..

वही आर.एस.एस. की शाखाएं संघ के सभी कार्यकर्ताओं के लिए प्रतिदिन करती हैं।

इसीलिए तो मोदी जैसे अनेक लोग इतने देशभक्त और ईमानदार हैं।

मुझे परवाह नहीं कि वह स्कूल गये थे या उन्होंने किसी विषय में एम.ए.भी किया था या नहीं।

एक व्यक्ति जो स्वामी विवेकानंद को पढ़ता है या आर.एस.एस. की शाखा में जाता है, देश में किसी भी स्तर पर हो रही गड़बड़ी से आहत होता है और अपने पद-प्रतिष्ठा व अपनी जान तक की भी परवाह न करते हुए अपने कर्तव्य का निर्वहन करता है। वह हर पैमाने पर.. आई.आई.टी. या हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की डिग्री वाले उन बदमाशों से कहीं अधिक बेहतर हैं।

वरना अधिक शिक्षित लोग परिवार,समाज, व देश-दुनियाँ की हरपल लुटिया डुबोने में लगे हैं।

यस, मेरे ख्याल से आज देश की युवा पीढ़ी को इसी तथ्य को गहनता से समझने की आवश्यकता है।

हम, अपने स्वयं के लोकाचार , भारतीय संस्कृति व अपने देश की अच्छाई में ही विश्वास करें।

कम पढ़े-लिखे जरूर हैं मग़र ऐसे गद्दारों से हर दृष्टि में बेहतर हैं।

जरूर पढ़ें।👆

सभी लेखों की तुलना में शायद मेरा ये लेख कहीं अधिक “आई-ओपनर” है।

इसीलिए एकबार पढियेगा जरूर

धन्यवाद👍

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