“रोजमर्रा के अपने व्यवहार में आपको कुछ लोग ऐसे भी मिलते होंगे, जो आपकी पीठ पीछे निंदा करते होंगे..
और ज़ाहिर सी बात है, जिनमें कुछ समालोचक होंगे तो कुछ आलोचक भी होंगे।
मेरे अनुभव की समझ ये कहती है कि, आप कभी भी ऐसे लोगों से घृणा मत करिएगा। वे आदतन मुफ्त में आपको.. ‘आपकी’ कमियों की जानकारी देते हैं, वर्ना
आप ही बताइयेगा..? इस दुनियाँ बिच ‘ग़लती’ किससे नहीं हों दी ए ..? “एरर इज ह्यूमन” प्रोवर्ब को कौण नी जां न दा. ए..? आलोचक हों या समालोचक आचरण की शुद्धि के लिए तो वे एक आवश्यक कैरेक्टर हैं।
सोचो! यदि किसी मामले में बड़े वकील साहब से आप परामर्श लें, तो फीस के नाम पर लाखों रुपया देना होगा। सही-सलाह महंगी हो गई हैं.. फिर भी उस सलाह की कोई गारेंटी नहीं है।
दरअसल, आप मेरे चश्मे से देखें, तो ऐसे चरित्र के लोग “काबिल ए तारीफ़” होते हैं न कि उपेक्षित।
ऐसी स्थिति में यदि कोई व्यक्ति आप को मुफ्त में अच्छी सलाह दे रहा है..आपके चित्त का शुद्धिकरण कर रहा है, तो मेरे ख़्याल से वह आपका बहुत बड़ा शुभचिंतक है।
वह व्यक्ति चाहे आपके सामने आपमें दोष निकाले, चाहे वह आपकी पीठ पीछे आपकी किसी कमी को अन्य लोगों से कहता फिरे.. और भले ही वह जानकारी वाया-वाया आप तक पहुंच जाय। हालांकि, उसका ये रवैया जैसा भी है। आखिरकार है आपके हित में ही।
आप उस व्यक्ति द्वारा बताई गई अच्छी सलाह पर अथवा उसके बताए गए खुद के दोष पर खूब गहराई से चिंतन करें,सोचें, विचार करें.. उन्हें यथार्थ की कसौटी पर परखें “उसने जो आपमें दोष निकाले हैं.. क्या वे सही है..? क्या वे दोष वास्तव में आपके अंदर हैं.? यदि हैं, तो उस सत्य को तत्काल स्वीकार करें, और उन दोषों को अविलम्ब दूर करें, तो इससे आपके आचरण की शुद्धि होगी। और जीवन पवित्र होगा। जिससे आपके सारे दुख दूर हों जाएंगे।
जिन कमियों के कारण आप जो गलतियां करते थे..अपराध होते थे..वे गलतियां, वे अपराध सब दूर हो जाएंगे। अर्थात भविष्य में आप वैसी गलतियां पुनः नहीं दुहरायेंगे। और उनके दंड से भी बच जाएंगे।”
इससे स्पष्ट होता है कि, यदि कोई व्यक्ति कभी आपके बारे में कभी इस तरह की बात करता है तो वह अपनेपन से आपको करेक्ट करने की चेष्टा कर रहा है।
इसीलिए वह घृणा का नहीं सदैव धन्यवाद का पात्र है। आपको तो उपकार मानना चाहिए। और जब भी वक्त मिले, उसका हिर्दयतल से आभार व्यक्त करना चाहिए।
दूसरा पक्ष — “उसके द्वारा बताई गयी कमियां यदि आपके अंदर हैं ही नहीं, तो फिर चिंता किस बात की..? तब तो आपको मस्त एवं प्रसन्न रहना चाहिए।”
क्योंकि दुनियाँ में बहुत से लोग अल्पज्ञ के साथ-साथ अपने-अपने पूर्वाह ग्रहों से भी तो ग्रसित रहते हैं। उन लोगों के जानने में.. अर्थात आपको ठीक से समझने में कई बार भूल भी हो,तो सकती हैं। कभी-कभी वह अज्ञानतावश भी आप पर झूठे आरोप-प्रत्यारोप लगाये जा सकते हैं। और कभी जानबूझकर भी।
चाहे अनजाने में लगाए अथवा जानबूझकर लगाए, उनके कर्म का फल तो वे ही भोगेंगे। परंतु आपको तो उनकी बात से लाभ उठा लेना चाहिए। जैसा कि ऊपर बताया गया है। “यदि आप ऐसा करेंगे तो आपके दोष कम होते जाएंगे, और आप में अच्छे गुण आते जाएंगे।
परिणामस्वरूप “आपके दुख कम होते जाएंगे, और सुख बढ़ते जाएंगे।”
” जिससे आपका जीवन आनंदमय होगा”
इसीलिए वे लोग..
“काबिल ए तारीफ़!!!” हैं। 👍